रविवार, 24 दिसंबर 2017

मृत "देह" के संस्कार क्यों होते हैं -जानें -झा "मेरठ "

प्रत्येक व्यक्ति के षोडश क्यों होने चाहिए ,ये समस्त बातें आलेखों में माध्यम से आप लोगों ने जान लिया | अब ध्यान दें -संस्कार में प्रत्येक क्रिया के विपरीत क्रिया होती है ये आप सभी जानते हैं | दिन है तो रात भी होती है ,अच्छा होता है तो बुरा भी होता है ,सुख के साथ दुःख भी होता है | जैसा कि जीव जब माँ के गर्भ में आता है तो सनातन संस्कृति के अनुसार तीन संस्कार गर्भ के अन्दर रहने पर ही होते हैं --गर्भाधारण ,पुंसवन और सीमन्त संस्कार -ये संस्कार गुप्त होते हैं साथ ही इन संस्कारों को माता पिता ही करते हैं | वही जातक जब भूमण्डल पर आता है तो जातक के सान्निध्य में माता पिता षोडश संस्कार कराते हैं | जैसा कि प्रकृति के नियम हैं सीधा का उल्टा होता है -तो जैसे तीन संस्कार गर्भ के अन्दर होते हैं -इसमें जीव भी होता है ,देह भी होती है किन्तु अवलोकन जीव का नहीं होता है मात्र स्पर्श से ही माता पिता को जीव की स्थिति की जानकारी होती है | गर्भ के अन्दर शिशु होता है और तीन संस्कार शिशु की उन्नति हेतु माता पिता करते हैं | ठीक इसी प्रकार जब शरीर का अवसान होता है तो यहाँ देह तो होती है पर आत्मा नहीं होती है | मृत देह के भी तीन संस्कार होते हैं --पिण्डदान ,प्रेतदान और अग्निदाह  ये तीनों क्रिया करने पर मृत देह की आत्मा आगे की ओर चली जाती है -वापस नहीं आ सकती है | ऐसा नहीं करने पर मृत देह की जैसी अवस्था होती उस आत्मा को उसी अनुरूप समय को तब तक उसी प्रकार की योनियों -प्रेत ,पिशाच ,भूत ,चुड़ैल ,डाकिनी शाकिनी ,ब्रह्म डाकिनी -इत्यादि में व्यतीत करना होता है जब तक कोई सुपात्र व्यक्ति उस आत्मा का वैदिक रीति से उद्धार न करें | ---अब आप इस बात को ऐसे समझें -जैसे किसी की कोई गाड़ी खराब हो गई तो मेकैनिक पुरानी गाड़ी के पार्ट को उस गाड़ी में लगा देगा तो खराब गाड़ी चलने लगेगी | ठीक इसी प्रकार से मृत शरीर के संस्कार नहीं होने पर तांत्रिक अपनी क्रिया में उस मृत शरीर से काम चलाकर दूसरे को हानि पहुंचा सकता है | अतः ज्ञानी पुरुष मृत शरीर के संस्कार कर अपने -अपने पितृ ऋण से उऋण होते हैं | -ये संस्कार सभी सनातन धर्मी के लिए हैं | ये संस्कार आर्यावर्त के हैं | आप भी अलग नहीं हैं | आगे की चर्चा आगे करेंगें |आपका एस्ट्रो वर्ल्ड हिन्दी सेर्विस झा "मेरठ-- फ्री ज्योतिष एकबार सेवा हेतु यहाँ पधारें ----https://www.facebook.com/kanhaiyalal.jhashastri

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