शुक्रवार, 29 दिसंबर 2017

संसार के सभी आंग्ल भाषा के नूतन वर्ष से -क्यों चलते हैं -पढ़ें !झा "मेरठ "

संसार को चलाने वाले एक हैं | सभी के प्रत्यक्ष देवता सूर्य -चन्द्र ही हैं | सभी के जीवन अग्नि ,वरुण ,पवन -पृथ्वी से ही चलते हैं | सभी जीवों का जगत एक जैसा ही है, पर रहन -सहन, भेष- भूषा ,खान -पान ,दिनचर्या ,भाषा ,संस्कृति और संस्कार अलग -अलग हैं | अतः सभी ने अपनी -अपनी संस्कृति के अनुसार नूतन वर्ष का प्रारम्भ भी अपनी -अपनी संस्कृति के अनुसार प्रारम्भ  किया | सनातन संस्कृति की नजर में सभी  भाषाओँ की जननी संस्कृत है अतः नवीन वर्ष {संवत }की शुरुआत चैत्र माह  से शुरू होती है | भारतीय भूभागों पर भी बहुत मतान्तर हैं -कहीं {बिहार }गुजरात  में  पंचांग की शुरुआत  अगस्त  से होती है | मुस्लिम समुदाय में नववर्ष की शुरुआत हिजरी के अनुसार होती है | भारतीय चंद्र वर्ष शाके की शुरुआत भी आगे पीछे होती रहती है | अंग्रेजी वर्ष में पहले मतान्तर थे -लेटिन भाषा के अनुसार पहले साल की शुरुआत फरवरी से होती थी | --यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है --एक वर्ष 365 दिन के होते हैं --इसी क्रम में अंग्रेजी भाषा के साल के सभी महीनों के तिथियों के अंतर होते हैं किन्तु -जोड़-365 ही होते हैं | इसी तरह --चन्द्रमा के वर्ष के माह केवल -28 दिन के ही होते हैं -इनको पूरा मलमास माह से किया जाता हैं साल में 20 दिन कम होते हैं | संवत में तिथियों की घटा -बढ़ी के कारण दिन कम हो जाते हैं तो साल के 365 दिन पूरा करने हेतु 2 वर्षों में मलमास का सहारा लेना होता है | अब नेता तो सभी होंगें किन्तु प्रधानता तो प्रधान नेता को ही मिलेगी ---भले ही संस्कार और संस्कृति अलग -अलग हों किन्तु मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है तो सबके साथ मिलकर चलना होगा तभी आप विकास कर सकते हैं या एक दूसरे को समझ भी सकते हैं या समझा भी सकते हैं | अतः --सभी ने अपने -अपने नवीन वर्ष की शुरुआत भले ही अपनी -अपनी संस्कृति के अनुसार करते हैं किन्तु 365 दिन का साल किसी न किसी विधि से सभी को पूरा करना होता है | -- -इस नियम पर आंग्ल भाषा को प्रधानता दी गई साथ ही यह भाषा और साल जन -जन को अपने में समेत ली --तभी आज हमारे बच्चे भले ही पांच नहीं जानते हों फाइव जरूर जानते हैं | यह मलाल भारतियों को ही नहीं आता है ,संसार के सभी लोग अपनी -अपनी संस्कृति को भरसक बचाने की कोशिश करते हैं पर हाथ मल -मल के रह जाते हैं | --कृपया ध्यान दें --हमें भी अपनी संस्कृति से अथक स्नेह है किन्तु आंग्ल भाषा का नूतन वर्ष की शुरुआत करना सबकी मजबूरी है -आज इस आस्था को कोई रोक नहीं सकता है |

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