शुक्रवार, 13 अक्तूबर 2017

आप बीती पर है सच्ची -मेरी आत्मकथा "झा -मेरठ "भाग -{20}

1996 -अब हम 26 वर्ष के हो चुके थे | राहु में शुक्र का अंतर समाप्ति की ओर था | आज हमने पहलीबार अपनी कुण्डली का मंथन किया | आप लोगों में से बहुत से लोग ऐसे होंगें -जो बात मैंने पहले कही कि मेरी आत्मा से आवाज आयी और मानो मेरे साक्षात आराध्य गुरु सरकार मुझको समझा रहे थे -इस बात को सही नहीं मानते होंगें -इसका मैं एक प्रत्यक्ष प्रमाण देता हूँ | जब मैंने आत्मा की बात सुनी उसके बाद हमने अपनी नजरों से दुनिया को झांकने की कोशिश की ,हम मन ही मन सोचने लगे -95 प्रतिशत लोग आचार्य नहीं है फिर भी मन्दिरों में रहते हैं ,2 प्रतिशत लोग हैं जो सक्षम आचार्य हैं वो किसी की चाकरी नहीं करते हैं ,8 प्रतिशत लोग हैं जो किसी के सान्निध्य में रहकर कर्मकाण्ड करते हैं सभी अपना -अपना जीवन व्यतीत करते हैं --फिर तुम कर्मकाण्ड क्यों नहीं करना चाहते हो ,शास्त्र कहते हैं -हर व्यक्ति को दान लेना चाहिए और दान करना भी चाहिए ,शास्त्र कहते हैं -पढ़ना चाहिए और पढ़ाना चाहिए ,शास्त्र कहते हैं -यज्ञ करना चाहिए और कराना चाहिए -तभी यह सृष्टि चलती है | अपनी कमाई का दस प्रतिशत दान करने से धन शुद्ध हो जाता है -तो तुम भी ऐसा करो | यह सोचते -सोचते रात बीती ,अगले दिन एक व्यक्ति मुझको मिला जो यह जनता था कि यह विद्वान है और मेरे जैसे व्यक्ति की जरुरत थी | वजह थी चैत्र नवरात्रि का समय था किसी यजमान को शप्तशती के लोम -विलोम पाठ कराने थे -उसे इस पाठ की जानकारी नहीं थी अतः वो व्यक्ति मुझको भेजा, जब मैं पंहुचा तो मैंने देखा -पूछने वाले व्यक्ति के वदन पर ढंग के वस्त्र नहीं हैं, बीड़ी पीता है और मुझको पूछता है -तुम लोम -विलोम सप्तशती के पाठ करना जानते हो -पहले तो शकल देखकर क्रोध आया -फिर धन की जरुरत थी तो शान्त हो गया और मैंने कहा -गुरूजी बिना पुस्तक देखे आपको मैं पूरी पुस्तक सुना सकता हूँ | उन्होंने जो पूछा सभी का जबाब दिया | बोले धन तुम्हारे हिसाव से काम मेरे हिसाव से -मैंने कहा जी गुरुदेव | मेरे पाठ करने से यजमान और गुरु दोनों खुश हुए | एक दिन मुझको अपने पास बुलाया गुरु ने -जब मैं उनके पास गया तो बोले हम तुमसे खुश है ,तुम्हें जो चाहिए बोलो ----अब मुझको ऐसा लगा स्वभाव से तो अच्छे हैं पर इनका रहन -सहन मेरे योग्य नहीं है फिर भी मैंने कहा मैं पढ़ना चाहता था ,हमारी पढ़ाई रुक गयी --बोले क्या पढ़ना चाहते हो -मैना कहा बीएड करना चाहता हूँ, दिल्ली से, बोले कितना पैसा चाहिए मैंने कहा 15000 हजार बोले ये चैक लो, साथ में 51 रूपये भोजन हेतु भी लो ,इतना ही नहीं उन्होंने एक माणिक की अंगूठी स्वर्ण की दी ---आपलोग जो मेरे हाथ की अनामिका अंगुली में अंगूठी देखते हैं उन्होंने दी | अब मुझको पूर्ण विस्वास हो गया कि मेरी आत्मा की आवाज नहीं मेरे आराध्य गुरु ये हैं | ध्यान दें जब संसार परित्याग कर देता है तो सद्गुरु अपनी गोद में उठाते हैं तब परमात्मा से साक्षात्कार होता है | ----आगे की परिचर्चा कल करेंगें | आप चाहे बालक हों ,युवा हों ,गृहस्थ हों चाहें बुजुर्ग हों ! सभी के योग्य यह पेज https://www.facebook.com/kanhaiyalal.jhashastri है-- साथ ही एकबार फ्री ज्योतिष सेवा प्राप्त करें और ज्योतिष के ज्ञान के लेखों की नवीन गंगा में रोज डुबकी लगायें ।यकीं नहीं आता है तो शिकायत करें -09897701636 +09358885616 -आपका एस्ट्रो वर्ल्ड हिन्दी सर्विस " {मेरठ -भारत }संचालक -पंडित -के ० एल ० झा शास्त्री {शिक्षा -दरभंगा ,मेरठ ,मुम्बई }

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