शुक्रवार, 6 अक्तूबर 2017

आप बीती पर है सच्ची -मेरी आत्मकथा "झा -मेरठ "भाग -{2}

जन्मकुण्डली सच बोलती है --मेरा जन्म चन्द्रमा की महादशा में हुआ | उच्च का चन्द्रमा होने के कारण -खेती में उपज अत्यधिक हुई | माता पिता गदगद थे | यह स्थिति केवल ढाई वर्ष के लिए रही क्योंकि रोहिणी नक्षत्र के तृतीय चरण में जन्म हुआ था जिसकी अबधि केवल इतनी ही बची थी | दीदी के बाद मेरा आगमन हुआ था साथ ही धन -धान्य की बृद्धि होने से परिवार में मेरा लालन पालन उत्तम दर्जे का हुआ | मेरा रंग काला था ,दुबला पतला था पर माता पिता का प्यारा था | जन्माष्टमी की रात्रि को जन्म होने के कारण नाम -कन्हैया रखा गया जबकि कुण्डली का नाम -विश्वनाथ था | कहाँ भगवान श्री कृष्ण और कहाँ मैं दरिद्रभंजन |  खैर ! हर पिता का पुत्र श्रीकृष्ण जैसा ही होता है | जब मैं ढाई वर्ष का हुआ तो मंगल की दशा चालू हुई 7 वर्षों के लिए | लगन में सूर्य -मंगल और केतु ,की युति के कारण अनायास मेरे बालों में आग लग जाती थी | मेरे पिता मेरी कुण्डली दिखाने हेतु बड़े मर्मज्ञ ज्योतिषी के पास गए -उन्होंने कहा -आपका पुत्र एक दिन राजा बनेगा | पर ये नहीं बताया कि राहु की दशा पूरे परिवार को दरिद्रभंजन बना देगी | मेरे पिता मेरे प्रति राजा का सपना देखने लगे ,आज भी मैं अपने पिता का राजा हूँ | 1970 से 1980 तक राजयोग में जीता रहा | माता पिता ,भाई -बहिन समाज ,परिवार का सुखद आनन्द मिला | आगे राहु की दशा का वर्णन कल करूँगा | आपका -एस्ट्रो वर्ल्ड हिन्दी सर्विस झा "मेरठ "दोस्तों आप भी अपनी -अपनी राशि के स्वभाव और प्रभाव को पढ़ना चाहते हैं या आपकी राशि पर लिखी हुई बातें मिलतीं हैं कि नहीं परखना चाहते हैं तो इस पेज पर पधारकर पखकर देखें - https://www.facebook.com/kanhaiyalal.jhashastri

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