सोमवार, 9 अक्तूबर 2017

आप बीती पर है सच्ची -मेरी आत्मकथा "झा -मेरठ "भाग -{1४}

-दोस्तों -मेरी जीवनी की कथा जितनी आगे बढ़ेगी रोचक बातें सामने आयेंगीं | ---अस्तु -अभी तक मातृभाषा -मैथिलि और देव भाषा संस्कृत भाषा से जुड़ा था | अब हिन्दी भाषी क्षेत्र में पदार्पण हुआ | रेडियो का आनन्द लेते समय एक दिन विविध भारती -राष्ट्रीय प्रसारण सेवा "नई दिल्ली "से गाने का आनन्द ले रहे थे कि एक मैडमजी आकाशवाणी से बोली हमारे तमाम श्रोता हमसे मिल सकते हैं | बस फिर क्या था अगले ही दिन हम अपने मामा जो दिल्ली में रेलवे में भोगल {आश्रम }नई दिल्ली में रहते थे वहां पंहुचा और मामा से कहा मुझको आकाशवाणी से बुलाया है मेरे साथ चलो | मामा बहुत खुश हुए ,वहां पंहुचा ,पहुंचने पर मामा बाहर खड़े रहे हम अंदर गए जाने पर हमने मैडमजी का नाम लिया और कहा उन्होंने मुझको बुलाया है | एक माथुर साहव थे मध्यप्रदेश से उनकी देख रेख में यह आकाशवाणी थी ,उन्होंने सोचा -यह योग्य व्यक्ति है इसीलिए पुष्पा दीदी ने बुलाया होगा उस दिन वो दीदी नहीं आयी थीं | माथुर साहव बोले इस कमरा में बैठो और यह चिट्ठी पढ़े मैं रिकार्डिग करता हूँ | मैंने चिट्ठी पढ़ी पढ़ने के बाद उस कक्ष में बुलाया रिकार्डिंग सुनाया बोले कुछ कमी समझ में आती है | मैंने कहा नहीं सर !एकबार फिर मौका दिया हमने दुबारा फिर वही गलती की | माथुर साहव बोले ऐसा लगता है जैसे तुम सत्यनारायण की कथा पढ़ रहे हो ,जबकि देखने में लगते नहीं हो ,मैं पेंट शर्ट में था इसलिए वो पहचान नहीं पाए कि मैं वास्तव में पंडित ही हूँ | आगे बोले हिन्दी का उच्चारण तुम्हारा ठीक नहीं है जैसे -श को स ,पेड़ को पेर ,यानि तमाम कमियों को बताया | हमने उनसे एकबार और मौका देने का अनुरोध किया वो बोले यह कौन सी जगह है मैंने कहा क्रिकेट स्टेडियम ,बोले यहाँ क्या होता है -मैंने कहा एकदिवसीय मैच होते हैं ,बोले इस क्रिकेट के बारे में क्या जानते हो- मैंने कहा सब कुछ तो बोले -200 शब्दों में एकदिवसीय मैच के बारे में लिखकर लाओ तो 200 रूपये तुमको देंगें | अब हम बाहर आये ,मामा  बोले क्या हुआ हमने कहा बात पक्की हो गयी पर मुझको कुछ लिखकर लाना है | मामा खुश हुए | अब हम अपना हाल बतायें -मुझको पहलीबार अहसास हुआ कि मेरी हिन्दी कितनी कमजोर है | फिर हमने पुस्तकालय में बैठ -बैठकर तमाम पत्रिकाओं को पढ़ने लगा यह जानने की कोशिश करने लगा कि क्रिकेट के बारे में कैसे लिखें कि हमारे आलेख को माथुर साहव स्वीकार कर लें | अपनी बोलने की भाषा कैसे शुद्ध हो इसके लिए अथक प्रयास करने लगा | हमने कोशिश की बिना किसी की सहायता के और आलेख लिखा फिर आकाशवाणी पंहुचा पर पूर्व प्रधानमन्त्री श्रीराजीवगाँधी का देहावसान हो गया दिल्ली अस्त व्यस्त हो गयी और हम पुनः पढ़ने मुम्बई चले गए ----आगे की चर्चा कल करेंगें --दोस्तों आप भी अपनी -अपनी राशि के स्वभाव और प्रभाव को पढ़ना चाहते हैं या आपकी राशि पर लिखी हुई बातें मिलतीं हैं कि नहीं परखना चाहते हैं तो इस पेज पर पधारकर पखकर देखें - https://www.facebook.com/kanhaiyalal.jhashastri ---आपका -एस्ट्रो वर्ल्ड हिन्दी सर्विस झा - मेरठ {भारत }

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