सोमवार, 9 अक्तूबर 2017

आप बीती पर है सच्ची -मेरी आत्मकथा "झा -मेरठ "भाग -{13}

1988 अब हम 18 वर्ष के हो चुके थे | तरुण अवस्था की शुरुआत थी | पहलीबार मातृभूमि का परित्याग करना साथ ही नई दुनिया में प्रवेश कारना  बहुत ही कठिन होता है | ---अस्तु --दीदीने जो सौ रूपये दिए वो रास्ते में खो गये पर हम जिस पटना राजधानी का नाम सुनते थे पहली बार इस नगरी को देखने का सुअवसर मिला | यहाँ हमारे बहुत परिजन रहते थे | बड़े ताऊ के दामाद और चार -चार भाई सभी हाईकोट के इर्द -गिर्द रहते थे और सभी अपने आप में सक्षम थे | खैर मैं जिस बड़े भाई के पास गया उन्होंने सम्मान तो बहुत किया पर उनकी नौकरी छूट चुकी थी और वो भी दुःखी थे फिर भी सम्मान किया शहर दिखाया सभी लोगों से मुलाकात करायी | पर किसीने कुछ मेरे बारे में न जाना न ही मुझपर दया की | अब यह भाई खुद दुःखी थे फिर भी पूछा किराया है ,मैंने कहा भाईजी मेरे पैसे खो गये | यह भाई भी दयालु थे कर्ज लेकर 50 रूपये दिए | मगध एक्सप्रेस के  लोकल डिब्बे में चढ़ा ,अत्यधिक भीड़ थी ,प्यास लगी न पैसे थे न पानी पिया ,किसी तरह मेरठ नगरी में आये | यहाँ जो गैर मामा थे उन्होंने श्री विल्वेशर संस्कृत महाविद्यालय सदर मेरठ में नाम लिखबा दिया | एक रजाई और थाली दी | यह महाविद्यालय उत्तम दर्जे का था यहाँ किसी प्रकार की दिक्क्त नहीं थी क्योंकि यहाँ अपने यहाँ के बहुत छात्र थे साथ ही अपने मामा जो थे | इतना ही नहीं मामाजी के ससूर विद्यालय के अध्यापक थे उन्होंने ही सभी छात्रों को मेरठ लाये थे ,सबकी व्यवस्था की थी ,सभी उनका आदर करते थे ,वो निर्विकार थे ,खुद तो त्यागी थे पर चाहे अपने हो या पराये सबका ख्याल रखते थे ,मानो सभी छात्र उनकी संतान थे | ऐसा लगा जैसे मैं स्वर्ग में आ गया | सभी आजाद रहते थे ,कोई यहाँ समस्या नहीं थी | विद्यालय का प्रांगण स्वयं मंदोदरी जहाँ शिव की नित्य आराधना करते आती थी वही बाबा विल्वेश्वर नाथ विराजमान थे ,आवास ,देवालय ,भोजनालय ,वृक्षों की हरियाली सबकुछ यहाँ यानि सुन्दर व्यवस्था से युक्त यह प्रांगण था | यहाँ रहकर -मेघदूत ,अभिज्ञान शाकुंतलम ,साहित्य दर्पण जैसे ग्रंथों का अनुभव हुआ | यहाँ आते ही मामाजी ने मेरा कुर्ता बनवाया | अब हम यहाँ खुश थे | धन कमाने का साधन भी था | जितने पैसों की जरुरत थी कर्मकांड से उपलब्ध हो जाते थे | अब हम शहरी हो गए | पेन्ट -शर्त  पहनने लगे ,रेडियो रंग विरंग के खरीदे | रोज फ़िल्म दिखने लगे | ----आगे की चर्चा कल करेंगें | 
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