गुरुवार, 8 दिसंबर 2016

"राशियां"ज्योतिष में क्या होतीं हैं -पढ़ें !ज्योतिषी झा "मेरठ "


  • ------पृथ्वी के {सूर्य के चारो ओर परिक्रमा }रास्ते {मार्ग} को  12 भागों में विभाजित किया गया है । इस रास्ते के प्रत्येक जगह की पहचान केवल तारों के अनेक प्रकार के झुंडों से होती है । इस तारों के झुंड या ढेड को संस्कृत में राशि कहते हैं । आकाश स्थित भचक्र के 360 अंश या 108 भाग निश्चित आचार्यों द्वारा किये गए हैं -यानि एक राशि का अधिकार -9 अक्षरों तक होता है एवं समस्त भचक्र को 12 राशियों में बांटा गया है -यानि 30 अंश या ९ भाग की एकेक राशि होती है । -इन राशियों के क्रम {1 }-मेष -चिन्ह -मेढ़ा,अंग्रेजी में -एरीज {2 }-वृष =सांड़ ,अंग्रेजी में -तौरुस ,{3 }-मिथुन -युवा -दंपत्ति ,अंग्रेजी में जैमिनी ,{4 }कर्क =केकड़ा ,अंग्रेजी में =कैंसर ,{5 }सिंह -शेर अंग्रेजी =लिओ ,{6 }कन्या =कुमारी ,अंग्रेजी =विरगो ,{7 }तुला =तराजू अंग्रेजी = लिब्रा ,{8 वृश्चिक =बिच्छू ,अंग्रेजी =स्कार्पियो ,{9 }-धनु =धनुर्धारी ,अंग्रेजी =सैँगीटेरियस ,{10 }मकर =मगरमच्छ ,अंग्रेजी =कैप्रीकौर्न ,{11 }कुम्भ =घड़ा {कलश },अंग्रेजी =अकवेरियस ,{12 }-मीन =दो मछली ,अंग्रेजी पीसेस ----ध्यान दें -प्रत्येक राशि की क्रम -व्यवस्था एवं संख्या उतनी ही महत्व पूर्ण -जितना महत्वपूर्ण इसका चिन्ह है । -----दोस्तों आशा है जन्म्पत्रि में विद्यमान "राशियों  का मतलब समझ गए होंगें --आगे ज्योतिष की अगली बातों पर जिक्र करेंगें । आपका --एस्ट्रो वर्ल्ड हिन्दी सर्विस ज्योतिषी झा "मेरठ " -निःशुल्क ज्योतिष एकबार सेवा प्राप्त करने हेतु इस पेज पर-  https://www.facebook.com/kanhaiyalal.jhashastri  पधारने की कृपा करें -आपका लाभ ही सेवा का आधार है ।

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