गुरुवार, 22 दिसंबर 2016

"शंखनाद "नामक कालसर्प योग का प्रभाव पढ़ें !ज्योतिषी झा "मेरठ "

---किसी भी जन्मकुण्डली में अगर भाग्य स्थान अर्थात नवमभाव में राहु हो एवं पराक्रम क्षेत्र अर्थात तृतीय भाव  में केतु हो साथ ही सूर्यादि सातों ग्रह  दोनों मध्य स्थित हों तो "शंखनाद "नामक कालसर्प योग बनता है । प्रभाव -"शंखनाद "नामक कालसर्पयोग में जन्म लेने वाले जातक प्रायः अपने दाम्पत्य जीवन से या परिवार से दुखी रहता है । भाग्य एवं कर्म क्षेत्र उत्तम होने पर भी किसी को स्त्रीकष्ट तो किसी को पुरुषकष्ट तो किसी को संतान कष्ट या फिर परिवार कलह से ही पीड़ित रहता है जातक । ऐसे जातक को  जीवन में जाने -अंजाने कुछ गलतियां खुद से हो जाती है ,और अन्त में कठिन पश्चाताप ही हाथ लगता है । ऐसे जातक के गुप्त शत्रु बहुत होते हैं और शत्रुता  घर से ही शुरू हो जाती है । इस कारण वही शत्रुता बाहरी  जीवन में बिस्तार रूप ले लेती है । ऐसे जातक का नाम और लोकप्रियता विशेष होती है । ---निदान ---अपने -अपने ज्योतिषाचार्यों से निर्णय लें --धनाभाव या सरल उपाय यह है -पंचमी ,सप्तमि ,अष्टमी ,नवमी एवं चतुर्दर्शी तिथियों में दक्षिण मुखी हनुमानजी की उपासना करें साथ ही नारियल +प्रसाद + दक्षिणा के साथ यथा योग अर्पण करें केवल शुक्लपक्ष की तिथियों में -विजयी अवश्य होंगें । --आपका -ज्योतिष सेवा सदन{एस्ट्रो वर्ल्ड हिन्दी सर्विस } मेरठ {उत्तर प्रदेश } संचालक -पंडित के० एल० झा शास्त्री https://www.facebook.com/kanhaiyalal.jhashastri पत्ता -कृष्णपुरी 244 देहली गेट मेरठ उत्तर प्रदेश {भारत }संपर्क सूत्र -09897701636 +09358885616

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-आपका एस्ट्रो वर्ल्ड हिन्दी सर्विस झा "मेरठ "

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