गुरुवार, 15 दिसंबर 2016

ज्योतिष के वैद्यराज "सूर्यदेव "जानने हेतु पढ़ें !ज्योतिषी झा "मेरठ "

-----कोई भी लोक अथवा धरातल हो ,पृथ्वी के ऊपर हो या नीचे -सभी जगहों पर सूर्य-रश्मियों का अत्यधिक एवं अवश्य प्रभाव पड़ता है । रूप ,रंग ,माधुर्य एवं आकर्षण की अधिष्ठात्री ही नहीं अपितु जीवन को प्राणदायक विभूतियां भी प्रदान करती है । खनिज और धातु पदार्थों का निर्माण मार्तण्ड और विभावसु सूर्यदेव की क्षमा नामक किरण के स्पर्श से ही होता है । विटामिन डी की कमी से होने वाले रोग केवल सूर्यदेव की रश्मियों में स्नान करने से दूर हो जाते हैं ।  --------निर्माण और संहारकारक गैस भी उत्पन्न करने वाले पूषन नामक सूर्यदेव की किरणें ही हैं । जो अणु -आयुध रूप से विनाशकारी और विस्फोटन की विशेष शक्तियां सूर्यदेव की ही होती हैं । तेज और प्रकाश हमें सूर्यदेव से ही प्राप्त होते हैं । यदि सूयोदय न हो तो प्रकाश भी जगत को नहीं मिलेगा । सूर्यदेव का प्रकाश जगत के नेत्र हैं । वायु की निष्पत्ति भी सूर्यदेव ही हैं । सूर्यदेव की कलाएं ही वायु को गति देती हैं ।  --------सूर्यदेव अग्निपुंज हैं । उनकी तीव्रता जब तिगवांसु  बन जाती है तो उसमें शक्ति की उत्पत्ति होती है । यही फैलती है ,विस्तार और प्रसार के लिए मचलती है ---उस समय अवश्था बड़ी विकट
होती है । इस उग्र रूप को बवंडर ,वात्यचक्र और प्रलयंकारी का नाम दिया गया है । सूक्ष्मगति में भी इसका प्रवेश है और स्थूल रूप में भी ,गुण ,तत्व और पदार्थ ऐसा नहीं है --जहां सूर्यदेव का अंग समाविष्ट न हो ।            अस्तु  --ज्योतिष के राजा सूर्यदेव को प्राचीन काल में ऋषि -मुनियों ने "वैद्यराज -सूर्य" भी सिद्ध किया है । भगवान भास्कर की आराधना से समस्त रोगों की निवृत्ति होती है । कुण्डली में केवल सूर्यदेव का उच्च होना ही सशक्त जीवन होता है ।  -------------------------------ज्योतिष सम्बंधित लेखों को पढ़ना चाहते हैं या एकबार निःशुल्क ज्योतिष परामर्श चाहते हैं -तो इस लिंक पर पधारें बिना शर्त के -----https://www.facebook.com/kanhaiyalal.jhashastri -आपका एस्ट्रो वर्ल्ड हिन्दी सर्विस ज्योतिषी झा "मेरठ

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