सोमवार, 12 दिसंबर 2016

हमारे नक्षत्र पेड़ों से भी खुश होते हैं पढ़ें!ज्योतिषी झा {मेरठ }

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हमारे ऋषि -मुनियों ने प्रत्येक ग्रह एवं नक्षत्र से सम्बंधित पौधों के बारे में जानकारी की थी ,तथा नवग्रह एवं नक्षत्र वाटिकाएं की जानकारी कुछ ग्रंथों के द्वरा उपलभध भी करायी थी {1}-नारद पुराण{पौराणिक ग्रन्थ }{2}-नारद संहिता {ज्योतिष ग्रन्थ }{3}-राज निघंटु व्रेहतधुश्रुत{आयुर्वेदिक ग्रन्थ }{4}-शारदादितिलक {तांत्रिक ग्रन्थ -मन्त्र महार्णव ,श्रीविद्यार्नव,तंत्र आदि  {5}अन्य ग्रन्थ-आन्दास्रम,प्रकाशन ,वनस्पति ,अध्यात्म नक्षत्र -वृक्ष  इत्यादि ||            इन तमाम ग्रंथों के मध्यम से जाना जा सकता है -नक्षत्र वाटिकाओं से कितना लाभ हो सकता है | सदैव से यह भी मान्यता रही है -कि ग्रह नक्षत्रों के कुप्रभावों से वृक्ष एवं वनस्पतियाँ समाप्त या कम जरुर कर सकती हैं | भारतीय मान्यता में -सूर्य मंडल  के समस्त सदस्यों व उपसद्स्यों {जिसमें सूर्य एवं चंद्रमा भी शामिल हैं }को ग्रह कहा गया है |ये{ग्रह } धरती के करीब होने से इनकी स्थिति नित्य बदलती रहती है | नक्षत्र -धरती से अत्यधिक दूर होने के कारण परिवर्तन का अनुभव नहीं हो पाता है , अतः नक्षत्र को स्थिर कहे गए हैं | ज्योतिष विद ने -चंद्रमा के रास्ते को २७ भागों में बाटें हैं| प्रत्येक -२७ वें  भाग में पड़ने वाले तारामंडल के बीच कुछ विशेष तारों को पहचान कर उन्हें एक नया नाम दिया -जिन्हें हमलोग नक्षत्रों के नाम से जानते हैं |-इस प्रकार से -नवग्रहों एवं २७ नक्षत्रों की ज्योतिष में पहचान की गयी है ||         अस्तु -जिस प्रकार से शारीरिक कष्ट को दूर करने कुछ विशेष प्राप्ति के लिए हमलोग जिस प्रकार से रत्न धारण करते हैं |उसी प्रकार से -ग्रहों एवं नक्षत्रों से सम्बंधित पौधों को उगाने से भी लोगों को मनोवांछित फल मिल सकता है | -महर्षि चरक के अनुसार धर्म ,अर्थ ,कम ,मोक्ष  को प्राप्त करने हेतु -आरोग्य रहना आवश्यक है |स्वस्थ शरीर एवं दीर्घ जीवन प्राप्त करने के लिए  भोजन ,शुद्ध  ,वायु ,जल ,तथा प्रदूषण रहित पर्यावरण आवश्यक है |  बाबा तुलसी दास जी के अनुसार -             ------  "गगन समीर अनल जल धरनी |  इनकी नाथ सहज जड़ करनी ||      हमारे जीवन की भव्यता में -वनस्पतियों की अहम् भूमिका सदैव रही है |लगभग सभी कालों में -वन वाग ,उपवन ,वाटिका ,सर कूप ,वासी सोहई  की प्रथा रही है |आज भी हरियाली तथा शुद्ध पर्यावरण के प्रति हम जागरूक हैं ||            -----{1}-सूर्य की प्रसन्नता के लिए -मदार का वृक्ष लगायें |{2}-सोम {चंद्रमा }के लिए पलाश का वृषा लगायें {3}मंगल -के लिए खैर का वृक्ष {4}बुध के लिए  -अपामार्ग {लटजीरा }का वृक्ष लगायें {5}गुरु के लिए -पीपल का वरिश लगायें {6} शुक्र के लिए गूलर का वृक्ष {7}शनि के लिए -शमी का वृक्ष {8}राहू के लिए-दूब लगायें {9}केतु के लिए -कुशा लगायें ||        ----  हम 27 नक्षत्रों से सम्बंधित पौधों से लाभ का जिक्र आगे करेंगें  हैं आशा है अपने -अपने नक्षत्रों के पेड़ अवश्य लगायेंगें । ---भवदीय निवेदक -एस्ट्रो  वर्ल्ड हिन्दी सर्विस ज्योतिषी झा "मेरठ --ज्योतिष की एकबार निःशुल्क सेवा हेतु इस लिंक पर पधारें -- https://www.facebook.com/kanhaiyalal.jhashastri 

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