शनिवार, 10 दिसंबर 2016

ज्योतिष का मापक यंत्र नक्षत्र हैं -कैसे -पढ़ें !-ज्योतिषी झा "मेरठ "

  • ज्योतिष प्रेमियों को शंका हो सकती है कि -इस विराट आकाश में असंख्य तारागण हैं -तो ज्योतिषाचार्यों ने केवल 27 नक्षत्रों और 9 ग्रहों को ही प्रमुखता क्यों दी !-----अस्तु ---आकाश में एक गोल मार्ग है । इस मार्ग में पृथ्वी 1100 मील प्रति घंटे की गति से निरंतर चक्कर लगाया करती है । आकाश मार्ग में कोई सड़क तो है नहीं , न ही वहां मापक -पत्थर ही लगे हैं ,तब ये कैसे जानें कि पृथ्वी कितना चल चुकी है एवं अब कहाँ स्थित है । ---इस समस्या का हल हेतु जिस मार्ग पर पृथ्वी घूमती है उस मार्ग पर या आसपास स्थित नक्षत्रों में से 27 नक्षत्रों को चुन लिया गया और ये स्थिर नक्षत्र भी हैं । ग्रह तो घूमते रहते हैं किन्तु नक्षत्र अपने स्थान पर स्थिर रहते हैं । --इन नक्षत्रों से ज्योतिष ज्ञान हेतु ज्योतिषीजन  वो ही काम लेते हैं जैसे दूरी जानने के लिए मील के पत्थर से लेते हैं । --इस तरह से पृथ्वी के गोल मार्ग को 27 भागों में विभाजित किया गया । जिससे ज्योतिष की समुचित जगहों जानकारी मिल सके । --यहाँ एक विशेष बात यह भी है आकाश -मंडल में असंख्य ताराओं के समूहों द्वारा जो विभिन्न प्रकार की आकृतियां बनती हैं -उन्हीं आकृतियों अर्थात ताराओं के समूह को नक्षत्र कहा जाता है ,तथ प्रत्येक नक्षत्र का एकेक नाम रख दिया गया है ---अश्विनी ,भरणी ,कृतिका ,रोहिणी ,मृगशिरा ,आर्द्रा ,पुनर्वसु ,पुष्य ,आश्लेषा ,मघा ,पूर्वाफाल्गुनी ,उत्तराफाल्गुनी ,हस्त ,चित्रा, स्वाति, विशाखा , अनुराधा ,ज्येष्ठा ,मूल ,पूर्वाषाढ़ा ,उत्तराषाढ़ा ,{अभिजीत }श्रवण धनिष्ठा शतभिषा ,पूर्वाभाद्रपद ,उत्तराभाद्रपद ,रेवती --ये नक्षत्र हैं । --किसी समय वैदिक काल में अभिजीत नामक नक्षत्र की गणना भी की जाती थी परन्तु अब  27 नक्षत्रों को ही मानते हैं । --उत्तराषाढ़ा नक्षत्र की अंतिम 18 घटि एवं श्रवण नक्षत्र के प्रारम्भ की 4 घटि --इस प्रकार 19 घाटियों के मान वाला नक्षत्र अभिजीत है -सामान्यतः एक नक्षत्र की 60 घटि होती है --इसलिए आज भी जन्म समय -घटि +पल का इष्टकाल ही लिखा जाता है । आपका ज्योतिष सेवा सदन यानि एस्ट्रो वर्ल्ड हिन्दी सर्विस ज्योतिषी झा { मेरठ -भारत }ज्योतिष सेवा प्रत्येक रात्रि -7. 30 से 8 . 30 रात्रि तक निःशुल्क उपलब्ध रहती है । एकबार फ्री सेवा में तीन बातों को हमसे फ़ोन से जान सकते हैं । सेवा हेतु इस -पेज https://www.facebook.com/kanhaiyalal.jhashastri  को पसन्द करें -फिर सन्देश बॉक्स में राम राम शब्द लिखें -हमारा जबाब मिलेगा -तत्काल सेवा का लाभ लें

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

-आपका एस्ट्रो वर्ल्ड हिन्दी सर्विस झा "मेरठ "

शिव की विशेष पूजा कैसे करें -पढ़ें !" झा मेरठ "

भगवान शिव की आराधना नित्यप्रति करनी चाहिए ,उसमें भी श्रावण मास हो तो कुछ विशेष आराधना से विशेष प्राप्ति संभव है | अस्तु - ---भोलेनाथ की व...